पिछली प्रविष्टि की मिली टिप्पणियों से लगता है कि मैं जो बात कहना चाहता था कहीं पैसे और कम्पयूटर में डूब कर रह गई। गलती पूरी तरह से मेरी ही थी कि अपनी बात कहने के लिए कम्पयूटर इंडस्ट्री का सहारा लिया। राजीव भाई ने अपनी प्रतिक्रिया में माँग व पूर्ति तथा नव-सृजन हर जगह की बात की जिस मैं पूरी तरह से [...]
पिछले नौं साल से कम्पयूटर इंडस्टरी में काम कर रहा हूँ व उस से भी ज्यादा देर से इसके बारे में जानता हूँ। काफी बार यह प्रश्न दिमाग में आता है कि ये मार्किट कम्पयूटर ज्ञान को इतनी तवज्जो क्यों देती है? आज के दौर में एक साथ इतने सारे लोगों को बाकी लोगों से औसतन ज्यादा पैसे देने वाली [...]
आज मीडिया युग में सृजन शिल्पी जी का पत्रकारों के लिए संदेश पढ़ा -पत्रकारों, आओ अब गांवों की ओर लौटें ! पर अभी तक गांव उपेक्षित हैं के बारे में वे लिखते हैं कैरियर की दृष्टि से कोई सुप्रशिक्षित पत्रकार ग्रामीण पत्रकारिता को अपनी विशेषज्ञता का क्षेत्र बनाने के लिए ग्रामीण इलाक़ों में लंबे समय तक कार्य [...]
मुन्ने की माँ राज मां बनाती है, रत्ना की रसोई तो नित नए पकवान बनाती है पर अपने राम तो चाय ही बनाते हैं। अक्षरग्राम की शुरुआत में जब यहाँ कैलीफोरनिया में रात काली की जा रही होती थी तो जीतू भाई के कुवैत में दिन होता था व उस समय वह जीमेल चैट द्वारा अपनी [...]
कंस्लटिंग के चलते बहुत सी कम्पनियों में काम करने को मिलता है। बहुत से लोगों का काम करने के वातावरण को देखने, उसमें घुलने मिलने को भी मिलता है। इसे ग्लोबलाईजेशन की दुर्घटना कहें या कुछ और लगभग सभी कम्पनियों में कम्पयूटर स्टाफ में अपने देसी भाई यानि भारतीय भी खूब मिलते हैं। भारतीय होने [...]
जीतू भाई टीम नारद के पेज पर कहते हैं कि मिर्ची सेठ व्यस्त चल रहे हैं। पिछले कुछ दिन उसी व्यस्तता से थोड़ी छुट्टी मिली हुई थी तो कुछ नया करने की हूक पैदा हुई। कहते हैं कि एक चित्र हजार शब्दों के बराबर है तो फिर भाई वीडियो तो लाख के बराबर हुआ न। [...]
पिछले महीने एक खिलौना खरीदा इतना पसंद है कि श्रीमती जी का कहना है कि पहले लैपटॉप सौतन थी अब यह सौतन का बच्चा आ गया है। तो बताईए क्या। यदि आपने बता दिया कि मैं किसके बारे में बात कर रहा हूँ तो इसके बारे में आगे लिखेंगे।
आज यू-टयूब पर एक विडियो देखा। काफी मजेदार है। आप भी देखें [ev type="youtube" data="lWWKBY7gx_0"][/ev] एक और बात बट्स के लिए हिन्दी का थोड़ा सभ्यतावाला शब्द क्या होगा। सोचता हूँ तो या तो एक दम कलिष्ट शब्द समझ में आते हैं या फिर एक दम चालू भाषा के।
कहते हैं समय बड़ा बलवान, पर भाई मेरे ख्याल से अमरीकी समय से भी बलवान हैं। हर साल दो बार समय बदल देते हैं। मेरा इशारा है “डे-लाइट सेविंग्स” की तरफ। अभी आज सुबह समय एक घंटा आगे हो गया यानि कि स्प्रिंग अहेड या फिर बसंत उछाल। बसंत के आते ही सूरज थोड़ा पहले उगना शुरु हो जाता है व ज्यादा देर तक रोशनी रहती [...]
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