क्यूँकि फॉयरफॉक्स के गुणों के बारे में श्रृंख्ला लिख चुका हूँ इस लिए बनता है कि इसके बारे में फिर से लिखूँ। यदि उपरी तौर से देखा जाए तो आप कह सकते हैं कि केवल टैब्ड-ब्राउजिंग के लिए इतना हल्ला मचाना कहाँ तक लाजमी है। पर बात सिर्फ इतनी ही नहीं। इसका मुक्त-सोर्स व प्लगइन [...]

चिट्ठों की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है उनका अनौपचारिकता का लेखन। लिखते हुए भाई लोगों को इस बात की चिन्ता नहीं रहती कि सुन्दर लिख रहा हूँ कि नहीं। कहीं कुछ नियमों के बाहिर तो नहीं लिख दिया। कहीं संपादक की कैंची ज्यादा तो नहीं चल जाएगी मेरे लेख पर। लेख छपेगा भी नहीं। [...]

अनूप जी उर्फ फुरसतिया जी समय समय पर फूल व फुलझड़ियाँ छोड़ते रहते हैं। ताजा अंक है कविता जरुरत क्या थी जिसमें उनकी इनायत सभी चिट्ठाकारो पर हुई है। कविता का दूसरा पैरा बहुत ही जोरदार है जो की जरुरत की हिसाब से हर जगह फिट कर सकते हैं हम तो उंनीदे थे बढ़िया लिखने [...]

बचपन में जब भारत एक खोज आता था तो उसके आरंभ में आने वाला गीत बड़ा सही लगता था। सुनने में अच्छा था और बोल मुंह पर चढ़ भी गए थे। यहाँ आने के बात वह गीत के बारे में याद तो था पर उस से अधिक कुछ नहीं। फिर घूमते घूमते “Hymn of Creation” [...]

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