अभी थोड़े दिन पहले 7/7/7 निकली है उस दिन दुनिया के नए सात अजूबों की सूची जारी की गई। दुनिया में सात अजूबों के अलावा सात पाप भी प्रसिद्ध हैं। लेकिन इन सभी में से एक पाप ऐसा है जो सबसे बेकार हैं। चलिए देखते हैं आप की नजरों में सबसे घटिया पाप कौन सा [...]

डसिडेराटा – मैक्स एहरमैन की बड़ी ही सुंदर कविता है। अतानु डे की एक प्रविष्टि से इसके बारे में पता चला। बहुत ही कम शब्दों में मैक्स ने जिंदगी की बहुत सी बातें कह दी। मौका लगे तो पढ़िएगा। मैंने हिन्दी में एक पैरा अनुवाद करने की कोशिश की है । बाकी सारी की सारी अंग्रेजी में [...]

लीजिए जनाब यदि आप अभी तक ऐप्पल के सफारी नामक ब्राउजर का उपयोग करना चाहते थे लेकिन ऐप्पल न होने की वजह से न कर पाए हों तो अब आप कर सकते हैं। आज यहाँ सुबह सैन फ्रांसिस्को में स्टीव जॉब्स ने सफारी ब्राउजर के विंडोज़ पर उपलब्ध होने की घोषणा की। आप इसे यहाँ [...]

मानसी जी की एक प्रविष्टि पढ़ी मेरा बच्चा जानता है, पर अंक बुरे लाता है… जब मैं स्कूल में थी, मुझे हमेशा परीक्षा के अंकों से ही मापा गया। कभी किसी ने ये नहीं सोचा कि शायद मुझे लिखना अच्छा नहीं लगता हो। मुझे मालूम तो है इस प्रश्न का उत्तर मगर अगर कोई मुझसे [...]

कॉलेज के जमाने में होस्टल की मैस में शनिवार को नाश्ते में मूली के पराँठे मिलते थे। उस समय दोस्तों से मजाक में कई बार इस बात पर मनन होता था कि यदि हम बहुत सारे पराँठे खा लें और इसके बाद जो होता है थोड़े थोड़े अंतराल पर होने की बजाए अगर एक सार [...]

ऊपर वाली छवि है टाईम्स ऑफ इंडिया के पुराने सजाल की। यह पन्ना प्रथम पृष्ठ होता था, टाईम्स ऑफ इंडिया को पढ़ने छोड़ने के कारणों में से बहुत बड़ा कारण इनका यह थीम भी था। जब भी इसे देखता रक्तचाप बढ़ जाता, दिल धौकनी की तरह भागता। यदि आप अभी भी यह देखना चाहते हैं तो इस कड़ी पर क्लिकावें।  खैर आज कल नव-सृजन की बातें होती हैं। टी ओ आई [...]

पिछली प्रविष्टि की मिली टिप्पणियों से लगता है कि मैं जो बात कहना चाहता था कहीं पैसे  और कम्पयूटर में डूब कर रह गई। गलती पूरी तरह से मेरी ही थी कि अपनी बात कहने के लिए कम्पयूटर इंडस्ट्री का सहारा लिया। राजीव भाई ने अपनी प्रतिक्रिया में माँग व पूर्ति तथा नव-सृजन हर जगह की बात की जिस मैं पूरी तरह से [...]

पिछले नौं साल से कम्पयूटर इंडस्टरी में काम कर रहा हूँ व उस से भी ज्यादा देर से इसके बारे में जानता हूँ। काफी बार यह प्रश्न दिमाग में आता है कि ये मार्किट कम्पयूटर ज्ञान को इतनी तवज्जो क्यों देती है? आज के दौर में एक साथ इतने सारे लोगों को बाकी लोगों से औसतन ज्यादा पैसे देने वाली [...]

आज मीडिया युग में सृजन शिल्पी जी का पत्रकारों के लिए संदेश पढ़ा -पत्रकारों, आओ अब गांवों की ओर लौटें ! पर अभी तक गांव उपेक्षित हैं के बारे में वे लिखते हैं कैरियर की दृष्टि से कोई सुप्रशिक्षित पत्रकार ग्रामीण पत्रकारिता को अपनी विशेषज्ञता का क्षेत्र बनाने के लिए ग्रामीण इलाक़ों में लंबे समय तक कार्य [...]

मुन्ने की माँ राज मां बनाती है, रत्ना की रसोई तो नित नए पकवान बनाती है पर अपने राम तो चाय ही बनाते हैं।  अक्षरग्राम की शुरुआत में जब यहाँ कैलीफोरनिया में रात काली की जा रही होती थी तो जीतू भाई के कुवैत में दिन होता था व उस समय वह जीमेल चैट द्वारा अपनी [...]

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