संस्कृत में एक श्लोक है कि जब बाकी दुनिया अभी पेड़ों और जंगलों में ही रहती थी तब अपने यहाँ ऋषि-मुनि सभ्यता को विनाश से कैसे बचाया जाए के ऊपर पुस्तकें लिख रहे थे। अब वह पुस्तकें कौन सी हैं और इस में कितनी सच्चाई है यह तो बौद्धिक का विषय है। पर एक बात [...]

भई वैसे तो पिछले अनुगूँज की तिथि निकल चुकी है पर चिट्ठों की दुनिया का मजा ही ये है कि जब छपास पीड़ा हुई तुरंत निवारण कर लिया। तो नीरव जी ने जब पहले अनुगूँज का यह विषय रखा मन में बड़े विचार आए तो उन्हीं विचारों का ताना-बाना इस प्रविष्टि के तहत प्रस्तुत है। [...]

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