मानसी जी की एक प्रविष्टि पढ़ी मेरा बच्चा जानता है, पर अंक बुरे लाता है…
जब मैं स्कूल में थी, मुझे हमेशा परीक्षा के अंकों से ही मापा गया। कभी किसी ने ये नहीं सोचा कि शायद मुझे लिखना अच्छा नहीं लगता हो। मुझे मालूम तो है इस प्रश्न का उत्तर मगर अगर कोई मुझसे इसे ज़ुबानी पूछ ले, तो मैं बेहतर बता पाऊंगी। मैंने कक्षा में इस विषय पर हमेशा बहुत अच्छा काम किया होगा, पर परीक्षा मेरे बस का नहीं…कोई क्यों नहीं समझ पाता इस बात को?
कुछ इन्हीं बातों पर प्रकाश डालता एक विडियो है श्री केन रोबिनसन का। विडियो देखने के बाद मैं उनके बोलने की शैली, व चिकाई का फैन हो गया। वे भी एक बच्ची का उदाहरण देते हैं। यदि आप के पास 20 मिनट हैं तो यह विडियो जरूर देखें
[ev type="youtube" data="iG9CE55wbtY"][/ev]
5 Responses
kakesh
June 6th, 2007 at 6:41 pm
1अभी 20 मिनट नहीं थे..इसलिये नहीं देखा..बाद में देखते हैं
Manoshi
June 6th, 2007 at 6:49 pm
2thanks for posting the video. a must watch.
Anunad Singh
June 6th, 2007 at 10:37 pm
3स्कूल रचनाशीलता को ही कम नहीं करती, यह बच्चों का आई. क्यू. भी घटाती है। और बहुत से लोगों का विचार है कि ‘शिक्षा’ यथास्थिति (स्टैटस को) बनाये रखने का सबसे कारगर साधन है।
girish
June 9th, 2007 at 4:44 am
4सबसे पेहले तो मैं यह मानता हूँ की स्कूलों में बच्चे को मापना ही नहीं चाहिए – जब तक वोह थोड़ा बड़ा और समझदार ना हो जाए | उसके बाद, ना सिर्फ़ पढ़ाई, बल्कि खेल कूद और अन्य रुचियों को भी बढ़ावा देना चाहिए | अफ़सोस की आज कल सिर्फ़ याद किए हुए को जल्दी से लिखने की क्षमता को माना जाता है |
गिरीश
quillpad.in से हिंदी मैं लिखना, अब बहुत आसान
सफारी अब विंडोज़ पर by मिर्ची सेठ
June 11th, 2007 at 1:33 pm
5[...] http://ms.pnarula.com/200706/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%... [...]
RSS feed for comments on this post · TrackBack URI
Leave a reply
Categories
Archives
Links
Meta
Calendar
मिर्ची सेठ is proudly powered by WordPress - BloggingPro theme by: Design Disease