कहते हैं समय बड़ा बलवान, पर भाई मेरे ख्याल से अमरीकी समय से भी बलवान हैं। हर साल दो बार समय बदल देते हैं। मेरा इशारा है “डे-लाइट सेविंग्स”
की तरफ। अभी आज सुबह समय एक घंटा आगे हो गया यानि कि स्प्रिंग अहेड या फिर बसंत उछाल। बसंत के आते ही सूरज थोड़ा पहले उगना शुरु हो जाता है व ज्यादा देर तक रोशनी रहती है। समय एक घंटा आगे करने से आप पुराने समय के हिसाब से सात बजे उठेंगे जबकि समय होगा आठ। हाय राम एक घंटा कहां गया। देसी भाईयों को इससे बड़ी परेशानी होती है। एक भाई तो अपना समय ही ठीक नहीं करता।
अब आते हैं बनिया बुद्धि पर। आम धारणा है कि इस मुई डे-लाइट सेविंग्स के पीछे बिजली बचाने का कारण है कि। लेकिन पते की बात है कि अगर लोग ज्यादा जल्दी घर वापिस जाएंगे तो वे खरीदारी करने बाहर निकलेंगे या फिर गोल्फ वगैरह खेलेंगे। अब ऐसा होगा तो कितने धंधों को फायदा होगा। बस इसी के चलते यह कहानी हर साल होती है।
5 Responses
अनुराग मिश्र
March 11th, 2007 at 6:27 pm
1इससे ये भी फायदा है कि लोग अपने परिवारों के साथ “आउटडोर एक्टिविटीज़” ज्यादा कर सकेंगे, और ज्यादा प्रसन्नचित्त रह सकेंगे। खैर मुझे इससे कभी परेशानी नहीं हुई।
Tarun
March 11th, 2007 at 6:55 pm
2समय कितना ही आगे पीछे कर लें लेकिन आफिस में तो ८ घंटे ही काम करना पडता है, शाम को वक्त ज्यादा मिल जाये तो अच्छा ही है।
के. पी. तिवारी
March 11th, 2007 at 8:33 pm
3क्या फरक पड़ता है, समय तो अपनी गति से चलेगा. घड़ी को आगे करें या पीछे. घन्टा दो घन्टा, जितना चाहे कर लीजिए. ठीक वैसे ही जैसे घड़ी बन्द हो जाने से समय तो रुकने वाला नहीं है. पुरानी कहावत सुनी है ना मुर्गा बॉंग नहीं देगा सवेरा तब भी होगा. तो घड़ी आगे पीछे करना तो अपने मन को समझाना है. सूरज दादा तो अपनी चाल चलेगे ही. इसी बहाने यह तो पता चलता है कि मानव आजाद या स्वतंत्र् नहीं है. हो भी नहीं सकता- कैसी आजादी काहे की आजादी
Raman Kaul
March 12th, 2007 at 4:31 am
4हाँ यह बड़ा पंगा है। हाँ, कुछ तबदीली अच्छी रहती है। पिछले फाल बैक के समय मैं ने भी इस बारे में लिखा था। सुझाव है कि अंग्रेज़ी पोस्ट-स्लग वाले यूआरएल प्रयोग करें। पर्मालिंक्स सरल रहेंगे। मैं ने अभी बदले हैं, बड़ा स्मूथ ट्रांज़िशन हुआ है।
श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'
March 12th, 2007 at 4:41 pm
5भईया हमें तो आज तक ये बात ठीक से समझ नहीं आई कि ये चक्कर क्या है। :०
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