क्या कभी आपने ऐसी पुस्तक पढ़ी है जिसे आप पढ़ते जाएं व लिखने वाले की तारीफ करते जाएं। कुछ ऐसी ही किताब पढ़ी पिछले हफ्ते। अमीरी, कैसे बनें व कैसे बनाए रखें पर इससे पतली व बढ़िया किताब शायद न पढ़ी हो। किताब में दिए गए फंडे वैसे तो बहुत ही सरल हैं व कहानियों के माध्यम से कहे गए हैं पर सटीक हैं एकदम। शुरु के पन्नों में दो दोस्त बातें कर रहे हैं कि – यार हम लोग इतनी मेहनत करते हैं, अपने अपने धंधे में बेहतरीन हैं फिर पैसे के मामलें कंगाल। क्या वजह हो सकती है। तो दोनो सोचते हैं कि बेबीलोन जहाँ वे रहते हैं के सबसे अमीर आदमी से पूछते हैं। यह अमीर भी फर्श से अरश वाला अमीर है व भलामानस है व उन्हें अपने अमीर होने के नुस्खे बताता है। सुधीजनों के लिए फ्री में अमीर होने के सात नुस्खे जो बेबीलोन के सबसे अमीर अर्काड ने बताए थे
बस यही सामान्य सी बाते हैं आशा है आप ध्यान में रखेंगे। मिर्ची सेठ तो ने हर बात को मणको पर लिख कर माला बना ली है व यही माला जपते हैं। मौका मिले तो जरूर पढ़िएगा।
5 Responses
आशीष गुप्ता
July 22nd, 2006 at 8:19 pm
1अमीर होने से सबसे सरल नुस्खा: लोगों को अमीर कैसे बने की किताबें लिखके बैचते रहो।
ये सेल्फ़-हेल्प पुस्तके बड़ी ही विचित्र होती हैं। एक और प्रसिद्ध किताब ‘rich dad poor dad’ में लिखा था कि खुद का घर liability है asset नही। विपरीत सलाहें?
pankaj
July 22nd, 2006 at 10:21 pm
2आशीष जी
टिप्पणी के लिए धन्यवाद। यह पुस्तक बड़ी पुरानी है शायद 1930 की व लिखने का तरीका आज कल की सेल्फ हेल्प पुस्तको वाला नहीं है। साथ ही जो बाते बताई गई हैं वह 1930 के समय के हिसाब से ही है। घर लायबिल्टी है बहुत बड़े मोर्टगेज के साथ। कैलिफोर्निया में रहते हुए घर का analysis तो पूरा हो ही जाता है।
पंकज
SHUAIB
July 23rd, 2006 at 7:47 am
3भाई जी – कौनसी किताब लिखें? ये भी तो नुखस बता देते
आशीष
July 23rd, 2006 at 8:46 am
4ट्रेन से जा रहा था, एक भीखारी मिला…
आदतानुसार उससे कह दिया..”आगे जाओ ”
उसने जवाब दिया “आप मुझे जानते नही है ,’पैसे कमाने के १०१ तरीके’ किताब मैने ही लिखी है”
“तो भाई भीख क्यो मांग रहे हो ?”
“ये उस किताब का १०१ वां तरिका है”
Ashok
September 16th, 2006 at 5:38 am
5wah bhai wah
maja aa gaya
RSS feed for comments on this post · TrackBack URI
Leave a reply
Categories
Archives
Links
Meta
Calendar
मिर्ची सेठ is proudly powered by WordPress - BloggingPro theme by: Design Disease