जिंदगी में बहुत सारी चीजें होती है जिन्हें आप मान लेते हो कि ये तो ऐसे ही होता होगा। पर उसके पीछे लंबी कहानी छिपी हो सकती है ध्यान नहीं आता। जब से काम शुरु किया एक क्यूब में ही काम करते आए हैं। कन्सलटिंग के रहते दूसरों से जरा ज्यादा क्यूबों में ही काम [...]
अम्बाला, चंडीगढ़ से माँ, भाई, बहनों, भांजों, भाभियों के फोन आ रहे हैं कि पंकज जन्मदिन की मुबारक हो। पर अपना दुःख तो कोई समझ ही नहीं रहा। भाई अब ऑफिशियली नवयुवकों की जमात से निकाल दिया गया हूँ व शायद जिम्मेवार माना जाने लगूँगा। गमगीन बैठा था कि भ्रमण करते नारद जी मिल गए [...]
१९४४ में लंदन युनिवर्सटी की ग्रेजूएट होती क्लास को दिए गए व्याख्यान में सी एस लुईस ने एक अंदर के छल्ले की बात की थी। उनके अनुसार हर ग्रुप, समाज, पार्टी में एक अंदर का छल्ला (अंग्रेजी में इन्नर रिंग) होता है और इस छल्ले से जुड़ने की, इस में होने की चाह सभी में [...]
शनिवार की सुबह है, और पहली खबर न्यूयार्क टाइम्स में पढ़ी की बम्बई के मशहूर डिब्बे वालों की जैसी लंच वितरण सेवा अब आमछी वैली में भी शुरु हो गई है। खबर के हिसाब से यह २००२ से चल रही है पर मुझे अभी ही पता चला। शुरु करने वाली हैं कविता श्रीवथसन। मजे की [...]
बचपन में जब भारत एक खोज आता था तो उसके आरंभ में आने वाला गीत बड़ा सही लगता था। सुनने में अच्छा था और बोल मुंह पर चढ़ भी गए थे। यहाँ आने के बात वह गीत के बारे में याद तो था पर उस से अधिक कुछ नहीं। फिर घूमते घूमते “Hymn of Creation” [...]
आज एक दोस्त से बात करते हुए एक और दोस्त राहुल का जिकर् आन पड़ा उसका ब्लॉग जाकर पढ़ना शुरु किया तो पता लगा कि भैया को गज़लों का शौक हो आया है। अब इसे छड़ेपन की निशानी माने या परिपक्वता की तो पता नहीं। पर राहुल काफी सही शेरों के बारे में लिखते हैं। [...]