आज घूमते घूमते विष्णूलोकम् पहुँच गए। वहीं मधुशाला कि इन सुंदर पंक्तियों को वाचन किया तो सोचा सहेज लेते हैं धर्मग्रन्थ सब जला चुकी है, जिसके अंतर की ज्वाला, मंदिर, मसजिद, गिरिजे, सब को तोड़ चुका जो मतवाला, पंडित, मोमिन, पादिरयों के फंदों को जो काट चुका,कर सकती है आज उसी का स्वागत मेरी मधुशाला।
तो जनाब पता चल ही गया कि वर्डप्रैस के रचियता मैट बाबू सीनेट से त्यागपत्र देने के बात क्या करने वाले हैं। आज ही पता चला कि उन्होंने अकिस्मत नामक एक प्लगइन घोषित किया है जो कि ब्लॉग-स्पैम रोकने में सहायक होगा। इसे अपने अंग्रेजी ब्लॉग बीटा थॉट्स पर डाल दिया है । देखतें हैं [...]
किसी जमाने में बड़े दीदी सरिता मंगाया करते थे और मैं भी बड़े चाव से पढ़ा करता था। उस समय इस पत्रिका का स्तंभ हुआ करता था – सरिता मुझे शिकायत है। शीर्षक से पता चलता है कि पाठक अपने आस पास की जिन चीजों से शिकायत करते हैं को इस स्तंभ के लिए भेजा [...]
कुछ समय से अंतर्जाल पर फ्लॉक के आगमन के चर्चे चल रहे थे। काफी लोग इस की बात कर रहे हैं। फ्लॉक सिलकन वैली की हॉट स्टार्ट-अप है और यदि आप सिलकन वैली के बारे में कुछ भी जानते हैं तो इतना जानते ही होंगे की यहाँ सारे हाईप का हुक्का पीते हैं। इतना सुनने [...]
सूरज देव सिंह जी की कविता बढते कदम बहुत ही अच्छी लगी। यहाँ अपनी सहूलियत के लिए सहेज रहा हूँ आशा है वह बुरा नहीं मानेंगे. इन बढते हुये कदमो को न रोकना कभी मुश्किलो को देख कर हिम्मत न छोडना कभी लोग कहेगे बहुत कुछ सून के न बहकना कभी रास्ते कठीन हो फिर [...]