जीतू भैया भी मजेदार हैं, मुझ मूढ़ बालक की फोटू और चाणक्य की फोटू में समानता देख लिए, अब आप ही बताइए आप को नजर आती है क्या

अभी कुछ समय पहले एक ब्लॉग प्रविष्टि पढ़ी, बड़ी रोचक लगी। इस पर खूब मनन भी किया, हर चिट्ठाकार की तरह मन में विचार आया कि मौका लगते ही इस पर एक प्रविष्टि पेल दूँगा। अभी इस विचार को मन में घूमते हूए कुछ समय ही हुआ था कि राजेश जी सुमात्रा वालों ने अनुगूँज [...]

सुरेन्द्र मोहन पाठक मेरे प्रिय लेखक रहे हैं। पुरु जी का अंतर्जाल पर प्रकाशित होता कड़ी वार नावल पढ़ना शुरु किया तो पता नहीं किस कनेकश्न के चलते पाठक जी की लेखन शैली याद आ गई। ईमेल पर भाई लोगों से बात शुरु हुई तो पता चला कि नितिन बागला जी भी उनके बहुत बड़े [...]

मैं ब्लॉग एग्रीगेटर के रुप में ब्लॉगलाइन्स का उपयोग करता हूँ। कारण बड़े सीधे से हैं एक तो यह कि कभी भी कहीँ भी अपने प्रिय चिट्ठों के लेखकों के मन की पढ़ सकता हूँ, दूसरा यह कि सुबह सुबह मेरे कम्पयूटर से एक साथ हजारों चिट्ठों को खींचने के लिए रिक्वेस्टस नहीं जाती। ब्लॉगलाइन्स [...]

वैसे तो अनुनाद जी आयोजित अनुगूँज १२ का प्रसाद बंट चुका है पर अपुन भी अपनी खिचड़ी पका के ही मानेगें। आज मन में जो विचार आए पेल दिए। तो लीजिए हाजिर हैं दस विचार १. अवगुण नाव के पेंदे में हुए छेद के समान है जो अंततः नाव की तरह आदमी को डुबो ही [...]