इ जो देबू भईयाँ हैं न मन की बात पढ़ लेते हैं। मेरे दिमाग में बड़े दिनों से टैग के कीड़े कुलबुला रहे थे पर कभी कागज पर या कहें कि चिट्ठे पर नहीं उतारा। अब आप आलसी हो सकते हो दुनियो तो नहीं और खासकर देबाशीष सरीखे कर्मठ बंधू। पर कहें जित्ता मस्त लेख [...]

हाँ भाई पर लिखे काफी समय हो गया है। बस पिछले कुछ हफ्ते ऐसे गुजरे की जैसे रोलर कोस्टर का झूला हो। पहले कुछ हफ्ते प्रोजेक्ट की वजह से सप्ताह में लगभग पूरा दिन काम पर होते हुए भी सप्ताहंत पर ऑनकॉल रहना पड़ता था। बुरा हो इस टेक्नॉलजी का। गले में सेलफोन और बलैकबैरी [...]