14 Apr
Posted by pankaj as ऐसे ही
कभी कभी कुछ ऐसा पढ़ता हूँ जिसे सहेज कर रखने का मन करता है। पहले किसी आस पास के पन्ने पर लिख लेता था जो थोड़े दिनों में खो जाता था। लेकिन इ जो ब्लॉगवा है बढ़िया चीज़ है। विजय जी ने बिस्तर में तुलसी जी की यह पंक्ति लिखी और मैंने यहाँ सहेज ली [...]
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