कभी कभी कुछ ऐसा पढ़ता हूँ जिसे सहेज कर रखने का मन करता है। पहले किसी आस पास के पन्ने पर लिख लेता था जो थोड़े दिनों में खो जाता था। लेकिन इ जो ब्लॉगवा है बढ़िया चीज़ है। विजय जी ने बिस्तर में तुलसी जी की यह पंक्ति लिखी और मैंने यहाँ सहेज ली [...]
मेरे कॉलेज के समय के दोस्त के छोटे भाई की सैक्रामैण्टो में सिक्खी रिवाज से गुरुद्मारे में आनंद काज यानि शादी थी। रमण जी ने कंप्यूटर पर गुरबानी की बात की तो याद आ गई। शादी जिस गुरुद्मारे में थी वाकई हाईटेक था। ग्रंथ साहिब जी के दोनों तरफ दो बड़े बड़े पर्दे थे जिन [...]
अभी निरंतर के दूसरे अंक की स्याही भी नहीं सूखी और उसके बारे में लिख रहे हैं। जय हो इंटरनेट बाबा की। तो देबू भईया बताए रहे कि इ जो जाहू है एक ठो नई सर्विस निकाला है अपने चिट्ठों इत्यादि के लिए नाम दिए है – Yahoo 360 और मेरी भाषा में कहें तो [...]