अब चूंकि हम अक्षरग्राम पर तो राम राम कह चुके थे। इसलिए वहाँ तो हमें किसी ने नई प्रविष्टि बनाने नहीं दी। पर फुरसतिया जी द्मारा बुनो कहानी में पहली कहानी का अंतिम अंक पढ़के छपास पीड़ा ऐसी जागी कि हाँ भाई पर आके त्तकाल निवारण करना पड़ा। अनूप जी ने कहानी बड़े ही सही [...]