अब चूंकि हम अक्षरग्राम पर तो राम राम कह चुके थे। इसलिए वहाँ तो हमें किसी ने नई प्रविष्टि बनाने नहीं दी। पर फुरसतिया जी द्मारा बुनो कहानी में पहली कहानी का अंतिम अंक पढ़के छपास पीड़ा ऐसी जागी कि हाँ भाई पर आके त्तकाल निवारण करना पड़ा। अनूप जी ने कहानी बड़े ही सही [...]

लोजी एक और नई पहल, खाली दिमाग शैतान का घर। पिनक पिनक में हिन्दी चिट्ठों की पहली बोलती प्रविष्टि कर रहा हूँ। ख्याल नया नहीं है, ब्रिज जी भी कह चुके हैं कि सजाल पर गर कविताएं हिन्दी में बोलती पड़ी हों तो क्या बात है। नया प्रयास है जरा मुहब्बत से सुनिएगा। कड़ी नीचे [...]

अभी से ठीक एक मिनट पहले मेरे यहाँ अग्नि सूचक यानि कि फायर अलार्म बज पड़ा। थोड़ा घबराना स्वभाविक था। दौड़ कर दरवाजा खोला। तो देखता हूँ कि सारे अपार्टमेंट कामप्लेक्स में बज रहा हैं। थोड़ी तसल्ली हूई। वापिस आकर बीवी को बताया कि खतरे की बात नहीं। फिर वापिस बाहर निकला तो एक और [...]

आत्मचिंतन

एक बात जो कि हिन्दू होने के नाते बचपन से आपके दिमाग में बैठाई जाती है वह है कि – सभी धर्म समान हैं और एक ही जगह पहुँचने के अलग अलग रास्ते है। बड़ा ही अच्छा विचार है और एक अच्छे बालक होते हुए हम इसे अपनी जिंदगी में आत्मसात भी कर लेते हैं। [...]

मिर्ची सेठ

मैं जानता हूँ कि गाँव वालो कि निगाह बहुत पैनी है, इसलिए जब मैंने मिर्ची सेठ का उपनाम प्रयोग किया तो जान गए कि कौन है। पता नहीं पहले ये बात कही है कि नहीं, पर हम लोगों का खानदानी धन्धा मिर्ची बेचने का है। जब दादा जी पूर्वी पंजाब और अबके पाकिस्तान में थे [...]

आज अजय देवगन और ऐश्वर्या राय की रेनकोट देखी उसी के गाने के बोल शीर्षक में लिखे हैं। पर यह प्रविष्टि फिल्म के बारे में न हो कर, फिल्म की डीवीडी पर लिखी एक पंक्ति के बारे में है। पंक्ति कुछ ऐसे थी – वह एक छोटे से गाँव से कलकत्ता के बड़े शहर में [...]