जब अतुल ने लालू जी का विषय रखा तो सोचा कि अच्छा है खूब लिखेंगे। पर जब लिखने बैठा तो पता लगा कि मैं जितना जानता हूँ सब मीडिया की दी हुई सोच है। कभी बिहार जाने का मौका नहीं लगा। जो पता था वह यह कि बड़े मसखरे किस्म के घाघ नेता हैं जोकि पता नहीं कितने सालों से बिहार पर अपना राज्य जमाए हुए हैं। येन केन प्रकारेण कुर्सी बचा के रखे हैं। गर किसी कंपनी को चलाने के लिए कोई मैनेजर चुनना होता है तो देखते हैं कि वह कम्पनी के हित में काम करेगा के नहीं, ऐसा न होने पर उसे बाहर की राह दिखा दी जाती है। नेता भी राज्य का हित जो कि जन हित में है के लिए चुने जाते हैं पर यहाँ तो स्वहित सबसे पहले होता है। खैर इतनी सीमित सोच के बाद सोचा कि जब खुद कुछ समझ न आए तो बड़े क्या कहते हैं इस बारे में पता करना चाहिए। इंद्र शर्मा जी बड़ी ही परिपक्व सोच के ऐसे ही व्यक्ति हैं। हिंदूस्तान मोटर्स से सेवानिवृत हो कर वे आजकल दृष्टिकोण नाम का चिट्ठा लिखते हैं। बड़ा उपयुक्त व मार्गदर्शक ब्लॉग है उनका। वहीं पर उन्होंने लालू जी को एक मुक्त पत्र लिखा था जिस का यहाँ हिंदी अनुवाद कर रहा हूँ। मैंने विभिन्न माध्यमों द्मारा यह अनुवाद करने के लिए उनकी अनुमति लेनी चाहि पर उनसे संपर्क न बन पाया। आशा है वे इसके लिए बुरा न मानेगे। एक और बात यह पत्र मई के महीने में लिखा गया था इसलिए कई चीजें बदल चुकी हैं।
प्रिय लालू जी – बिहार के बेताज राजा
मेधापुर की सफलता की बधाई स्वीकार करें और छप्परा के स्थगित चुनाव जो कि एक खोज का विषय है की लगभग पक्की जीत के लिए पहले से बधाई स्वीकार करें। आप महान हैं और आपकी राजनीतिक क्षमता और दूरदृष्टि के आगे कम से कम बिहार में सभी पानी भरते हैं। पर बिहार फिर भी गरीब है। मुझे पक्का विश्वास है कि आप भी इन हालातों से खुश न होंगे। चुनाव आयोग द्वारा छप्परा में 26.4.2004 को हुए चुनाव को स्थगित किए जाने पर टीवी संवाददाता द्वारा आपकी राय जानने पर आपकी प्रतिक्रिया देख रहा था। आप बहुत खीझे हुए और नाखुश दिखाई दिए। यह आप और आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं है। आप अभी भी बिहार के ऋणी हैं। आप को यह ऋण बिहार से निकलने से पहले ही चुका देना चाहिए। मैं बिहार के शुभ चिंतकों में से एक हूँ। मैं इस बात की बहुत इज्जत करता हूँ कि कैसे आप कुछ नहीं से चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक की गद्दी पर पहुंचे। आप राजनीति में घुस कर नेता बनने वालों के लिए बहुत बड़ा उदाहरण हैं, और अपने आप में आने वाले कई सालों के लिए राजनीति प्रबधन के छात्रों के लिए शोध का विषय रहेगे। अब राबड़ी जी के बिहार के मुख्यमंत्री और शायद सोनिया जी के भारत के प्रधानमंत्री होने, पर आप अपने आप को बिहार की उन्नति कार्य में लगा कर इतिहास में अपनी जगह बना सकते हैं। कृप्या अपना अभियान व शैली बदलें, कुछ वैसी ही जैसे अशोक ने कलिंग की लड़ाई से बाद किया था। दिल्ली भूलिए और बिहार पर ध्यान दीजिए।
आप की नेतृत्व क्षमता सराहनीय है जो कि आप को इन योजनाओं को सफल बनाने के लिए अपने आदमियों जो कि आप को पूजते हैं को प्रयोग करने में काम आएगी। बस केवल दो साल के लिए बिहार की उन्नति व विकास पर ध्यान दें। बिहार से बाहर बसे बिहारी बड़ी लज्जा महसूस करते हैं जब वे बिहार के पिछड़ेपन, गरीबी, बढ़ते हुए अपहरण, दिन दिहाड़े हत्यायें, कानून व ब्यवस्था(सभी बेरोजगारी की वजह से), सड़कों कि घटिया हालत, आधुनिक उद्योगों की कमी या शिक्षा एवं स्वास्थ्य की कहानियां सुनते हैं। इस महान देश के विनीत दासविनम्र सेवक और बिहार के अपने पुत्र के कुछ सुझाव हैं
• कृप्या अपने कार्यक्रमों को स्थानीय साधनों के प्रयोग पर ही आधारित रखें। एक बार पहल तो कीजिए सहयोग के लिए बहुत लोग आगे आ जाएंगे।
• हर ब्लॉक मे कोऑप्रेटिव धंधे की तरह एक डेयरी इकाई और ज्यादा से ज्यादा गाँवों में दूध इक्कठा करने के केंद्र लगाइए। मतलब कि बिहार में श्वेत क्रांति ले आइए। आपका ग्रामीण परिवेश इसमें सार्थक लोगों को लाने में सहायक होगा। इस कार्यक्रम से हर परिवार को कुछ और आमदनी होगी। गुजरात वाले प्रसिद्ध डाक्टर कूरियन भी हमारे बीच हैं। आप को उन से मिलना चाहिए और उनका योगदान मांगना चाहिए। आपकी प्रसिद्ध(अच्छी या बुरी) किसी को भी अपने साथ काम करने के लिए मना सकती है। वे आपके साथ इस कार्यक्रम के लिए कोई लगनवाला प्रबंधक या टैक्नोक्रैट लगा देंगे और आप इस कार्यक्रम को सफलता पूर्वक पूरा कर सकते हैं
• कृप्या किसानों को सब्जियाँ और हो सके तो फल लगाने के लिए प्रेरित कीजिए। इन फल-सब्जियों की आवाजाही की साधन, शीत भंडार, मार्कटिंग और निर्यात के साधन उपलब्ध कराइए। गांवों में लोगों की घटती जमीनों के चलते यह उपयुक्त रहेगा। किसानों में इससे खुशहाली आएगी और वह साल में ज्यादा समय व्यस्त रहेंगे। साथ ही सभी गाँवों में व्यवसायिक पेड़ लगाने पर जोर दीजिए।
• अपने चहेतों को अपना सारा ध्यान पशुपालन में लगाने के लिए कहिए – अच्छी नसल की गाएं, भैंसे, बकरियाँ और भेड़ें बिहार में लाईए। और भी बहुत क्षेत्रों के साथ साथ यह क्षेत्र भी उपेक्षति पड़ा है, इस कारण से पशुओं की कमी हो गई है। साथ ही मुर्गी पालन व सुअऱ पालन को भी बढ़ावा दीजिए। फिर से, इस से ग्रामीण भाईयों के लिए रोजगार बढ़ेगा, चमड़ा उद्योग का भी कल्याण होगा और मांसाहारी जनता को खुराक मिलेगी। गाँवो के मुखियो को मौजूदा पानी की टैंकियां नए करने के लिए प्रेरित कीजिए। यह कृषि एवं मतस्यपालन के लिए पानी इक्कठा करने में मदद करेगा।
• आप को निर्धारित पैसों को उमदा किस्म की सड़के बनाने के प्रयोग में लाइए ताकि गाँवों को अच्छे से अच्छे तरीके से आपस में जोड़ा जा सके। मुझे इन सब के अनगिनत लाभ बताने की आवश्यकता नहीं है बस यह समझ लीजिए की गाँवो की उपज खरीदने वाले गाँव ही पहुँच जाँएगे। इन सड़को के रख-रखाव की जिम्मेवारी गाँवों के मुखियों को ही दे दे अन्यथा हो सकता है कि वही इन्हें नुकसान पहुंचा दें।
• पंचायतों को 2-3 गाँवो का मिल कर साप्ताहिक बाजार लगाने के लिए प्रेरित करें इससे कम पैसे वालों को अपनी उपज बेचने का मौका मिलेगा।
• स्थानीय कला और कलाकारों को बढ़ावा दें जैसे कि मधुबनी की छपाई औऱ भागलपुर का रेशम। मेरे विचार से यहाँ काफी सुशुप्त लियाकत छुपी है।
• पर्यटन स्थलों की महत्ता को और बढ़ाइए – जैसे की सासाराम, गया, बुद्धगया, वैशाली इत्यादि। यह तो साधारण सी बात है कि यदि पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तो उस क्षेत्र की रोजगारी और खुशहाली बढ़ेगी।
• व्यवसायी लोगों को अन्य प्रातों की तरह प्रबंधन, तकनीकी और उच्च शिक्षा के केंद्र लगाने के लिए प्रेरित करें।
हर गाँव में एक जन शौचालय बनवाईए। यह आवश्यक है। देसी खाद बनाने की जगहों का विकास करें और इनके प्रयोग को बढ़ावा दें।
और हाँ, कुछ और बातें…
बिहार के लोगों को अपनी जाति से अपनी पहचान रोकनी होगी। गर हिंदुत्व इस देश को तोड़ रहा है, को जाति आधारित राजनीति समाज में जहर घोल रही है। आप ही ऐसा कर सकते हैं और लोगों को अच्छा नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं। आइए लोगों की सोच बदलने की तरफ कार्य करें ताकि लोग अनजान आदमी से मिलने पर उसका नाम पूछें नकि “कौन जात से हो” आइए कुछ नौजवानों का अनुसरण करें जोकि अपनी कुलनाम अपने नाम से हटा रहें हैं।
• और आखिर में कृप्या दो और हो सके तो एक बच्चे वाले छोटे परिवार के फायदों को फैलाइए। बिमारु राज्यों में इस बात के प्रथम बनिए और केरल या तमिलनाडु की तरह बनें। मैं मानता हूँ कि हो सकता है यह आप के लिए कठिन हो। पर आप की एक बेटी आप की तरफ से इस कार्य को पूरा कर सकती है।
मैं इस सूची में और भी बहुत जोड़े सकता हूँ। पर आप बहुत समझदार और क्रियाशील हैं व बेरोजगारी की समस्या खास कर गाँवों में को दूर करने के और भी उपाय बूझ सकते हैं। कृप्या बिहार को अगले दो सालों में बदल दें। किसी भी परिवार के सबसे बड़े अभिशाप गरीबी तो जड़ से मिटाने के लिए आप उत्साह के साथ आगे तो बढ़ें साथ देने के लिए बहुत हाथ आगे आ जाएंगे। मैं आशा करता हूँ कि आप मेरे द्वारा यहां लिखी गई बातों को करने में निहित फायदों को पहचानेंगे। आपको शुभकामनाए और भगवान आपका साथ दे।
~ बिहार का एक विनम्र बेटा (इंद्र शर्मा)
2 Responses
irsharma
January 3rd, 2005 at 8:54 am
1I think the translation is fine. Indra
अनूप शुक्ला
January 12th, 2005 at 9:16 pm
2बढ़िया लिखा था लेख.
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