जब अतुल ने लालू जी का विषय रखा तो सोचा कि अच्छा है खूब लिखेंगे। पर जब लिखने बैठा तो पता लगा कि मैं जितना जानता हूँ सब मीडिया की दी हुई सोच है। कभी बिहार जाने का मौका नहीं लगा। जो पता था वह यह कि बड़े मसखरे किस्म के घाघ नेता हैं जोकि [...]

हर बार कि तरह इस बार भी सारी दुनिया के लिखने के बाद अपनी ढपली बजा रहा हूँ। फिल्म तो दो हफ्ते पहले देख ली थी, समीक्षा लिखने अब बैठ रहा हूँ। स्वदेस से बहुत लोगों को बहुत तरह की उम्मीदें थी। सबसे ज्यादा कि देखें लगान का निर्देशक क्या नया करके दिखाता है। नया [...]

कुछ समय पहले जीतेन्द्र जी ने एक प्रविष्टि लिखी थी जिसमें आप्रवासी भारतीयों की तुलना कुछ कुछ पेड़ से टूटे पत्ते से की थी कि आप्रवासी भारतीय पेड़ से टूटे पत्ते की तरह पेड़ से वापिस जुड़ नही सकते। हम उस डाल के पन्क्षी है जो चाह कर भी वापस अपने ठिकाने पर नही पहुँच [...]

कोहेनूर1 पर जब नाच की डीवीडी देखी तो पहली बार तो एक और बॉलीवुड फिल्म जानकर नजरअंदाज कर दिया। पर अगले सप्ताहंत पर जब देखा कि कोई भी नई फिल्म नहीं आई तो आया हूँ तो कुछ लेकर जाउंगा वाले अंदाज में नाच देखने के लिए उठा ली। अगर नाहक नंगेपन को नजरअंदाज कर दिया [...]

लीजिए जनाब भाई लोगों ने 2004 IndiBloggies पुरुस्कार घोषित कर दिए हैं। किसी बंधुवर ने मुझे भी पंच बनाया है। जिस के लिए मैं आभारी हूँ। अब देसी ब्लॉग भी कुकरमत्ते की तरह बढ़ते ही जा रहे हैं। तो इतने सारे चिट्ठों से कुछ निकालने मुश्किल तो होगा क्योंकि हर ब्लॉगर अपना दिल निकाल कर [...]