भई इंटरनेट के चलते दुनिया बड़ी मस्त हो गई है। पता नहीं कब कहाँ किस से मुलाकात हो जाए। अब देखिए न पहले जब हिंदी चिट्ठे की शुरुआत की तो हिंदी ब्लॉगमंडल के आदिपुरुष आलोक जी से बातें शुरु हुई। बाद में पता चला कि वे भी चंडीगढ़ के टोटों (जवान सुंदर लड़की) को ताड़ते [...]
अभी ताजा ताजा पता चला है कि ब्लॉगमंडल में जो मेले आयोजित होते हैं हिन्दी ब्लॉग धारी वहाँ छा रहे हैं और पता दिया मुझे इक नन्हीं कली उर्फ ट्रैकबैक ने एक समय पर ट्रैकबैकस् की काफी चर्चा हुई थी और विद्वानों ने इसे विपरीत-पथ का नाम भी दिया था।
संस्कृत में एक श्लोक है कि जब बाकी दुनिया अभी पेड़ों और जंगलों में ही रहती थी तब अपने यहाँ ऋषि-मुनि सभ्यता को विनाश से कैसे बचाया जाए के ऊपर पुस्तकें लिख रहे थे। अब वह पुस्तकें कौन सी हैं और इस में कितनी सच्चाई है यह तो बौद्धिक का विषय है। पर एक बात [...]
कलाम-ए-शुक्ला से एक कविता निकली थी जो कि कहीं टिप्पणियों में दबी पड़ी है तो हमहुँ सोचे की इस की मिट्टी झाड़ी जाए और नई पैकिंग के साथ पेशे खिदमत की जाए। अनूप बाबू आप की कविता पसंद आई तुम, कोहरे के चादर में लिपटी, किसी गुलाब की पंखुङी पर अलसाई सी,ठिठकी ओस की बूंद [...]
अभी अभी वीर-ज़ारा देख कर आ रहा हूँ। अब चोपड़ा जी की फैक्टरी से निकली है तो अच्छी तो होगी ही और जाहिर है कि प्रेम-कथा भी है (जैसे की देस में और दूसरी फिल्में भी बनती ही हैं) यदि आपको दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे पंसद आई थी तो यह भी पंसद आयगी। अभी [...]
अरे भईया – इ हमसे का भूल हो गई। ससुरे दिमाग का खाँजा ही घूम गया लगता है। कविता वाली प्रविष्टि पर बहुत फंडे हो गए हैं। पहले अतुल की टिप्पणी को अल्का की टिप्पणी समझ कर कुछ कह दिया और सुबह उनसे माफी माँगनी पड़ी अभी शाम में आ के देखते हैं कि कविता [...]
गर अल्का को भारतीय चिट्ठाकारों की शाहजादी कहा जाए तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। हाल ही में उन्होंने अपनी एक बड़ी ही सुन्दर कविता “The Ship” प्रकाशित की। श्रंगार रस के रसिक हम भी पुराने हैं इस लिए पढ़ के काफी आनन्दित हुए और प्रविष्टि अच्छी थी इसलिए टिप्पणियाँ पढ़ना भी लाज़मी था। वहाँ [...]
भई वैसे तो पिछले अनुगूँज की तिथि निकल चुकी है पर चिट्ठों की दुनिया का मजा ही ये है कि जब छपास पीड़ा हुई तुरंत निवारण कर लिया। तो नीरव जी ने जब पहले अनुगूँज का यह विषय रखा मन में बड़े विचार आए तो उन्हीं विचारों का ताना-बाना इस प्रविष्टि के तहत प्रस्तुत है। [...]
अब चूँकि अतुल भाई ने दोनों लोकतंत्रों के लोगों की चुनावी आदतों की तुलना कर ही दी है तो एक मेरी तरफ से भी। इस बार का अमरीकी चुनाव, पिछले भारतीय चुनाव की तरह ग्रामीण वोटरों के ही हाथ में था। जरा इस नक्शे पर गौर कीजिए और देखिए कैसे लाली मेरे लाल की जित [...]