लगता है बचपन में पंजाब केसरी पढ़ने का दिमाग पर काफी बुरा असर हो गया है। प्रविष्टियों के शीर्षक दिमाग से ऐसे निकलते हैं जैसे मैंने केसरी वालों के लेखकों की रोजी रोटी पर लात मारनी हो। अब देखिए न मुद्दे की बात से भी हट गया। तो जब से चौधरी साहिब कुवैत वाले जी [...]