पहले तो हिन्दी चिट्ठे पर अंग्रेजी में प्रविष्टि करने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ। पर बात ही ऐसी है थी। मुझे थोड़ा बहुत डिजीटल फोटो वगैरह लेने को शौक है। डिजिटल कैमरा वालों में कैमरे की पिक्सल शक्ति की चर्चा होती ही रहती है। इस पिक्सल शक्ति के बारे में यहाँ वर्णित लेख से अच्छा लेख [...]
लगता है इस मूढ़ बालक को सभी सभी पहचान गए हैं। और तो और कम्पयूटर प्रोगार्मस भी शिक्षा देने लगे हैं। पर मैंने भी सीखा है कि गर तोते से भी कुछ सीखने को मिले तो हिचकचाना नहीं चाहिए। कल weblogs.com वालों को थोड़े समय में एक से अधिक पिंग क्या भेज दिए उन्होंने कुछ [...]
मैंने आमों की बात की और संजय जी ने अपने बचपन का मजेदार किस्सा सुनाया। आखिरी में उनकी बात “कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन” ने मेरे सोच के घोड़ों को तेजी से दौड़ा दिया। हम सभी कभी न कभी इस बात की कामना अवश्य करते हैं कि हाय किसी तरह से बचपन के [...]
आप को मेरे आम्र प्रेम के बारे में शायद न पता हो। पहले भी एक बार यहाँ आमों की अनुपस्थिति का रोना आम – फिर तेरी कहानी याद आई पर रो चुका हूँ। इस मौसम में वॉन्स पर एक देस की तरह के आम नजर आए दिल के हाथों मजबूर होकर $1.69 प्रति आम भी [...]
आज ऑफिस में बैठे थे कि साथ वाले क्यूब से आवाज आई “Pankaj, do you know Jolly’s last name”। सहकर्मी स्कॉट प्रश्न पुछ रहे थे और जवाब जोकि ये था की जोली जी नाम खन्ना है। लेकिन मुझे “खन्ना” ना कहते हुए “खाना” कहना पड़ा। पता नहीं यहाँ के लोगों को आ का डंडा जोड़ने [...]
कहानियाँ किसे अच्छी नहीं लगती और गर प्रेमचंद सरीखे कहानीकार की हों तो सोने पे सुहागा। घूमते घूमते गूगल भैया ने “द्वारे द्वारे ज्ञान संपदा” पर ला पटका। पटका तो पटका बस यहीं के हो कर रह गए। यह जालस्थल प्रसिद्ध कहानीकारों, उपन्यासकारों की रचनाओं का जमावड़ा है। ज्यादातर रचनाएं प्रेमचंद, एवं यशपाल जी की [...]
MT मुझे टिप्पणी नहीं करने दे रहा, कहता है In an effort to curb malicious comment posting by abusive users, I’ve enabled a feature that requires a weblog commenter to wait a short amount of time before being able to post again. Please try to post your comment again in a short while. Thanks for [...]
अरे शीर्षक पर मत जाइए। ऐसा वास्तव में नहीं हुआ है। अपितु मेरी श्रीमती जी का यही मानना है। पर अपनी एवं मित्रों की बीवियों को देखकर लगता यही है कि शादी के कुछ समय बाद सभी बालाएं यही सोचती हैं कि उनके मिंया तो ऐंवें ही हैं। चलो छोड़ो इस बात को ये तो [...]
सैन डिएगो के पास एक जगह है – कार्लस्बाद। वहाँ बसंत में लगभग 50 एकड़ पर फूलों का बिछौना बिछाया जाता है। कमाल का दृश्य होता है। नीचे दी गई छवियों से आप भी आनंद लें कितने करीब हैं ये फूल चार परतें – आसमान आबादी फूल धरती इस पैनारोमा की बात ही कुछ और [...]
भाईयो एक ताज़ा खबर – गीगाओम वाले ओम मलिक जो कि Business 2.0 के वरिष्ठ लेखक भी हैं आजकल भारत में हैं और पूरे आठ साल बाद दिल्ली वापिस आए हैं। Outsourcing पर उनके नजरिए के लिए गीगाओम पढ़ते रहें। बाद में Business 2.0 का एक अंक भी इसे समर्पित होगा।